
फगवाड़ा, 2 सितंबर, 2026 ( आशीष शर्मा ) पूर्व आईएएस अधिकारी और विधायक बलविंदर सिंह धालीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी हालिया विदेश यात्राओं का पैटर्न यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकारी कूटनीति का लाभ चुनिंदा उद्योगपतियों तक सीमित हो गया है।
धालीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जिन देशों के दौरे करते हैं, उसके बाद उन्हीं देशों में अडानी समूह को बड़े निवेश या बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में अवसर मिलते दिखाई देते हैं। यह महज संयोग नहीं बल्कि एक ऐसा पैटर्न है, जिस पर देश को जवाब चाहिए। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इन परियोजनाओं और विदेश यात्राओं के बीच हुए निवेश समझौतों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
धालीवाल ने कहा कि उज्बेकिस्तान इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने दावा किया कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के बीच अडानी समूह की वहां ऊर्जा, खनन, बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्तावों पर चर्चा हुई है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उज्बेकिस्तान सरकार और अडानी समूह के अधिकारियों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बैठकें हुई हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीलंका में भी यही तस्वीर देखने को मिली। भारत-श्रीलंका संबंधों के मजबूत होने के बाद कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल जैसी रणनीतिक बंदरगाह परियोजना में अडानी समूह प्रमुख साझेदार बन गया। यह लगभग 800 मिलियन डॉलर की परियोजना है, जिसे 35 वर्षीय बीओटी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।
धालीवाल ने इज़राइल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत-इज़राइल के बढ़ते रिश्तों के बीच अडानी समूह ने हाइफा पोर्ट का अधिग्रहण किया, जो देश के सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों में से एक माना जाता है और क्षेत्रीय व्यापार की दृष्टि से बेहद रणनीतिक है। उन्होंने कहा कि तंजानिया में भी अडानी पोर्ट्स ने दार-एस-सलाम बंदरगाह के कंटेनर टर्मिनल-2 का संचालन अपने हाथ में लिया, जिसे पूर्वी अफ्रीका के सबसे महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स केंद्रों में गिना जाता है।
